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संजनाने हर रोज की तरह रात को खाना बनाया। आज ऊसने बीन की सब्जी, पराठे, कोफ्ता, पुलाव और २ तरह की मिठी डीश वनाई थी। ऊसने करीबन ४ लोगोंका खाना बनाया था।
संजना काफी मोटी थी। उसका पति रवी काफी पतला था। संजना का वजन रवीसे करीब ३० कीलो ज्यादा था।
संजना को अच्छे से खाना बनाना आता नही था। उसे खुद बाहर खाने की आदत थी। पर रवीको घरके खानेकी आदत थी। वो चाहता के संजना घरपर खाना बनाये।
संजना कोशिश करती पर उसका खाना रवी को पसंद नहीं आता था। फिर वो खुद मैगी या ओम्लेट बनाके खाता था। ऐसा कई बार होता था।
आज संजनाने काफी मेहनत से खाना बनाया था। कुछ भी कर आज ऊसे रविको खुश करना था। पर खाना बहोत ज्यादा बना। क्युकी
संजनाको दो दीनोसे गैस की बिमारी थी डॉक्टर ने कम खानेके लिए कहा था।
रवी घर आतेही पेहले नहाने गया। तब तक संजनाने खाना टेबल पर परोसके रखा। नहानेके बाद रवी खाने बैठा। ऑफीस मे ज्यादा काम की वजहसे वो गुस्से में था। ईतना खाता देखकर पेहेले ही वो गुस्सा हुआ और कहा "इतना खाना क्युं बनाया जब मै अकेलाही खानेवाला हुं। तुम्हे पैसौकी जराभी कदर नही है।" फीर ऊसने हर एक पदार्थ का स्वाद लिया और उन्हें कोसने लगा "ए चावल पके नही है। कोफ्तेमे नमक नही। पराठे जले है।" आखिर मै ऊसने कहा "तुमसे शादी करना ही गलती थी।" और वो सोने गया।
संजना बहोत दुखी हुई। वो रोने लगी। इतनी मेहनत की पर फीरभी डांट पडी।
आहिस्ता आहिस्ता उसका दुख नफरत मे बदलने लगा। ऊसे रवीसे काफी चीड आने लगी। उसने मन मे ठाना के बहोत हुआ ये पतिव्रत का नाटक। अब समय आगया है बताने का के कौन बॉस है। उसने मनमे एक प्लान बनाया।
ऊस प्लान के हीसाब से उसने सारा खाना अकेलेनेही खाया और सो गई।
सुबह जैसे ही रवी जाग गया उसने संजना को बाजुमे खडा पाया। वो पुरी नंगी थी। संजना ने उसे जगा हुआ पाया और उसके छाती पर पैर रखके पुंछा "जाग गये? नींद तो अच्छी आई होगी मुझे रुलाकर?"। ये केहकर उसने एक छोटासा पाद मारा। पररररररररर। रवी थोडासा हैरान हो गया। संजना उसके सामने पादती नही थी और पादती तो संकोचती थी। पर अब उसके चेहरे पर ना
ही संकोच था ना शरम।पर नजर मे एक कीसम की गुर्मी थी।
रवी ने कहां "देखो। मजाक मत करो। पैर हठाओ। " संजनाने कहा "एक शर्त पर। आपको रात का सारा खाना खाना होगा।"
रवी बोला "बस इतनीसी बात? चलो खा लेता हुं।"
संजना बोली "बस एक छोटीसी तकलीफ है। मै सारा खाना खा चुकी हुं। और वो खाना अब पाद बनकर बाहर आ रहा है।"
रवीने डरते हुये पुंछा "मतलब? मै कुछ समझा नही। "
संजनाने शांतिसे कहा "मतलब आपको मेरे पाद खाने होंगे। " और उदाहरण के लिये उसने एक हाथ अपने कुल्लोपर रख एक और पाद छोडी। पसससससस। और कामुक आवाज मै बोली "आंह । बडा मजा आता है जब पाद बाहर आता है। "
रवीने कहा" क्या बकवास कर रही हो? हठो मेरे ऊप्परसे।" वो उसका पैर छातीपे से हठानेकी कोशिश करने लगा। पर संजना ने पैर छातीपर और जोरोसे दबाया। और उसी पैरपर हाथ रख उसकी असहायता देखती रही। रवी पुरी ताकद लगानेके बावजूद उसका पैर हठा नहीं पाया।
संजनाने बोली "जितनी जल्दी हार मानोगे उतना अच्छा होगा। ऐसे या वैसे मेरा पाद तो तुम्हे खाना ही है। ". और एक "परररररररसटटटटटट"। रवी फीरभी नही माना और लडता रहा।
संजनाने फीर पैर निकालकर उसका एक हाथ पकडा और ऊसे बिस्तरसे नीचे खीछा। उसे घसिटकर वो बिस्तर से थोड़ा दुर ले गई। संजनाने रवीको ऐसी जगह पर लेटाया जहा आसपास पकडनेके लिए कुछ न था।
संजना उसकी छातीपर काफी उपर बैठ गई। उसने रवीके हाथ अपने पैरोतले दबाये। रवी का सिर्फ चेहरा उसके जांघोके बीच था। संजना कमरपर हाथ रखे पुरा वजन उसके छाती और गले पर रख बैठी रही। रवीने उसे हटानेकी नाकामयाब कोशिश की और थोड़ी देर बाद शांत हुआ। संजना निचे उसके चेहरेको देख मुस्कुराती रही।
संजनाने अपने बालोंसे रीबन निकाली और थोडा आगे आके रवीके चेहरेपे बैठ गई। रवी के हाथ अब खुल गये थे। पर क्युकी उसका पुरा चेहरा संजना के कुल्लोतले था वो सास नही ले पा रहा था। उसने जैसे तैसे अपना मुंह घुमा लिया। अब वो सास ले रहा था पर संजना का वजन गालोपे पडने के कारण काफी मुश्कील मे था।
संजनाने फीर थोडा पीछे होकर रवीके दोनो हाथ पकडे और अपने रीबनसे ऊसे बांध दी ये। हाथ बाँधते हुए उस ने अपने कूल्हे थोडे उपर लिये। इससे रवी को थोडी राहत  मिली और उसने अपनी गर्दन सीधी की। संजनाने यही मौका देख एक पाद मारी। और फीरसे नीचे रवीके चेहरे पर  बैठ गई। रवी को गर्दन घुमाने का मौका मिलाही नहीं। उसे वो पाद सुंघनाही पडा। संजना मुस्कुराकर बोली "आदत डाललो मेरे पादकी। अब ये तुम्हे बार बार करना है।"
जैसे ही  हाथ बांधकर हो गए संजना थोडी पीछे आई और नीचे रवी के पास देखकर चिडाकर कहाँ "हुश्श, चलो अब तुम्हारे हाथ मुझे परेशान नही करेंगे। अब मुख्य कार्यक्रम शुरू करते है। मेरे स्वादीष्ट पाद खानेके  लिये तैयार हे और उम्मीद हैं के तुम्हे तुम्हे वो बहोत पसंद आयेंगे। "
संजना उल्टा होकर रवीके मुंह पर बैठ  गई। अपने कुल्हे रवीके चेहरेसे थोडे उप्पर रख संजना बोली, "चलो अब मुंह खोलो"। रवीने मुंह नही खोला तो संजना बोली "अब तुम जबरदस्ती चाहते हो तो... " और ये केहकर संजनाने जोरसे रवीके अंडे दबाए। रवी जब दर्दसे चिल्लाया तो संजनाने अपना नंगा गुद रवीके खुले मुहपर रखा और अपने कुल्लोपर जोर लगाके ऐसे बैठक मारी के रवी मुंहको बंद ना कर पाए। वो बोली "तुम्हारी भलाई इसीमे हैं के आज मेरी सारी बातें मानलो।"
फीर गुदको रवीके मुंहमे और अंदर डालकर संजना बोली "शुरुआत चटपटे स्टार्टर से करते है।" उसने  रवीके मुंह में पादना शुरु किया और उसे धमकी दी के अगर मुंह बंद करने की कोशिश की तो फीरसे अंडे दबाएगी। घबराया हुआ रवी मुंह खुल्ला रख उसके पाद खाता रहा।
पहले १०-१५ पाद ५-६ सेकंद के और जोरोके आवाज वाले थे। फीर संजनाने बोली "स्टार्टर काफी अच्छे थे ना। अब मेन कोर्स परोसा जायेगा।" ईसके बाद जो १५-२० पाद मारे गए वो बिना आवाज के लेकीन लंबे करीबन १०-१२ सेकंद के थे।
रवीकी हालत खराब हो रही थी पर संजना मजे ले ले रही थी। संजना बोली " मेन कोर्स खतम हुआ। अब मिठे मिठे डेजर्ट खास आपके लिए।" इसके बादके  २०-२५ पाद बहोत लंबे १५-२० सेकंद के और काफी गिल्ले थे। ईन पादोमे वायु कम और द्रव व घने अंश ही ज्यादा थे।
अंत में जब संजनासे संडास रोक ना पाया तो उसने ऊठनेकी सोची। पर ऊठनेसे पहले उसने कुछ और सोचा और बोली "खाना खत्म हुआ। अब बर्तन साफ करने  है। मेरी गुदको अपनी जबान से अच्छेसे साफ करो।" जब रवीने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी  तो संजनाने रवीके अंडे पकडकर कहा "मुझे जोरोसे संडास आई है। जबतक तुम मेरी गुद साफ नही करोगे मै तुम्हारे मुहपर बैठी रहुंगी। फीर भले संडास तुम्हारे मुहमे करनी पडे। और अगर पाद इतनी है तो सोचो संडास कीतनी होगी।"
यह सुन रवी डर गया और फटाफट उसकी गुद चाटने लगा। संजना बोली "बहोत अच्छे। जुबान को और अंदर लाओ और गुद चुसो भी। गुद अंदरसे और बाहरसे चकाचौंध साफ होनी चाहिए। और जल्दी करो मुझसे संडास रोकी नही जा रही।"
घबराया हुआ रवी जुबान को गुदमे अंदर घुसाकर चुसने लगा और  गुद साफ़ करने लगा। अंततः संजना बोली "आज के लिए इतना सबक काफी है। " और संडास की तरफ दौडी।
A story written in Hindi around the pic I posed with similar title. इस कहानी में लड़की लड़के के मुंह पर बैठती है। और मुंह मे पादती है।
muh pe baithi, muh me padi.
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December 3, 2017
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